laxmi ji ki aarti lyrics

laxmi ji ki aarti lyrics – लक्ष्मी जी की आरती (Laxmi Ji Ki Aarti – ॐ जय लक्ष्मी माता)

Article
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

दोस्तों महालक्ष्मी कही जाने वाली माता लक्ष्मी जी का पाठ बहुत सारे लोग करते हैं क्या आपने कभी किया है इससे पहले कभी नहीं किया है और आपको याद नहीं है करना कैसे हैं आपको लक्ष्मी जी की आरती पढ़ेंगे और माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करेंगे और माता लक्ष्मी जी की पूजा सभी वक्त ज्यादातर दीपावली में खास करके करते हैं क्योंकि महालक्ष्मी जी को सौभाग्य और शुभ की देवी कहते हैं

महालक्ष्मी जी की आरती

महालक्ष्मी जी की आरती गाने से पहले मैं आपको बता दूं माता लक्ष्मी जी को लड्डू के भोग लगाने चाहिए और महालक्ष्मी जी की पूजा गणेश विष्णु भगवान जी के साथ है तो भक्तों को दोगुना फल प्राप्त होता है आपको बता दें आपकी जानकारी के लिए कि मां लक्ष्मी जी का पूजा पाठ करने से घर की आर्थिक स्थिति सही हो जाती है यदि आपकी हर की स्थिति सही नहीं चल रही है तो आप महालक्ष्मी जी की आरती का पाठ करें आपके घर में हो रही पैसे की तंगी दूर हो जाएगी

माता लक्ष्मी जी की आरती कैसे करें?

माता लक्ष्मी जी की आरती करने के लिए आपको नहाने के पश्चात स्वच्छ कपड़े पहन लेना है और आरती करते समय ऊंची राख के साथ मध्यम स्वर्ग और मध्यम वर्ग में आरती को गाएं आरती का उच्चारण सभी शुद्ध शब्दों से होना चाहिए और मधुर शब्दों से।

लक्ष्मी जी की आरती लिखी हुई

lakshmi ji ki aarti: आइए सभी भक्तों साथ मिलकर महालक्ष्मी जी की आरती गाते हैं प्रेम से बोलिए महालक्ष्मी जी की जय।।

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

लक्ष्मी जी की आरती वीडियो

FAQs: लक्ष्मी जी की आरती

लक्ष्मी जी की आरती कितनी बार करनी चाहिए?

आप सुबह और साम दोनों समय कर सकते है |

लक्ष्मी जी की आरती करने के नियम क्या है?

लक्ष्मी जी की आरती करते समय आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए और एकाग्र मन से करना चाहिए । आप नहाकर स्वच्छ कपड़े पहनकर मां लक्मी जी की पूजा करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *